ठीक है, आपके निर्देशानुसार, यहाँ V3.8 वर्धित संस्करण का पूरा हिंदी अनुवाद है, जिसमें V3.4 के अधिक विस्तृत बौद्ध धर्म शब्द, अवधारणाएँ, सिद्धांत और विवरण V3.7 के ढांचे में एकीकृत किए गए हैं, और निर्वाण और यथार्थ सत्य की गहरी व्याख्या को शामिल किया गया है।


परम प्रज्ञा संचालन प्रणाली: दस-स्तरीय प्रज्ञा पिरामिड एकीकृत अभ्यास प्रणाली (V3.8 वर्धित संस्करण - गहन बुद्धधर्म एकीकरण और कर्म एवं कार्य-कारण की गहरी समझ और निर्वाण एवं बुद्ध-प्रकृति का एकीकरण और यथार्थ सत्य एवं निर्वाण की गहन व्याख्या और V3.4 विवरण पूरक)

प्रस्तावना: जागरण का आधारशिला और अभ्यास की रूपरेखा

यह प्रणाली पारंपरिक बुद्धधर्म (Buddhadharma) के ज्ञान के सार (जिसकी चौड़ाई और गहराई त्रिलक्षण (Tri-lakṣaṇa), चार आर्यसत्य (Catvāri Āryasatyāni), द्वादश निदान (Dvādaśāṅga-pratītyasamutpāda / Twelve Nidānas), प्रतीत्यसमुत्पाद (Pratītyasamutpāda), शून्यता (Śūnyatā) [स्वभाव-शून्यता]—और आगे बढ़ते हुए महापरिनिर्वाण सूत्र द्वारा व्याख्यायित परमार्थ-शून्यता (First Principle Emptiness), जो नित्य, सुख, आत्मा, शुद्ध (常樂我淨) वाले निर्वाण (Nirvana) के अद्भुत अस्तित्व की ओर इंगित करता है, न कि विनाशकारी शून्यता की ओर। यह परमार्थ-शून्यता यथार्थ सत्य (True Characteristic), धर्मधातु (Dharmadhātu), परम ज्ञान (Ultimate Wisdom), परमार्थ-सत्य (First Principle Truth) के रूप में भी जानी जाती है, जिसका सार "अनाकार स्वरूप (Characteristic of No-Characteristic)" है, यानी सभी भ्रामक विभेदक रूपों का उन्मूलन स्थल, यह निर्वाण का वास्तविक सार है। प्रणाली मध्यम मार्ग (Middle Path), निर्वाण, विशेष रूप से स्थायी निर्वाण (Permanent Nirvana) की अवधारणा पर भी जोर देती है, और दृढ़ विश्वास है कि सभी सत्त्वों में बुद्ध-प्रकृति है (All Sentient Beings Possess Buddha-Nature) और तथागतगर्भ (Tathāgatagarbha) का सार्वभौमिक अस्तित्व है, और विज्ञप्तिमात्रता (Yogācāra) के त्रिस्वभाव (Tri-svabhāva) [परतंत्र स्वभाव, परिकल्पित स्वभाव, परिनिष्पन्न स्वभाव] और अष्ट विज्ञान (Eight Consciousnesses) [विशेष रूप से आलयविज्ञान (Ālaya-vijñāna), मनोविज्ञान/मनस् (Manas-vijñāna), मनोविज्ञान/चेतना (Mano-vijñāna)], तियानताई (Tiantai) संप्रदाय के एकचित्त त्रिकाय दर्शन (One Mind Three Contemplations), त्रिसत्य का सामंजस्य (Perfect Harmony of the Three Truths), एक क्षण में तीन हजार लोक (Three Thousand Realms in a Single Moment of Thought), और अवतंसक (Huayan) संप्रदाय के धर्मधातु प्रतीत्यसमुत्पाद (Dharmadhātu Pratītyasamutpāda), षट् लक्षण (Six Characteristics) सामंजस्य, दश गहन द्वार (Ten Mysterious Gates), सर्वधर्म-अप्रतीघात (Non-obstruction between Phenomena), एक ही अनेक है, अनेक ही एक है (One is Many, Many is One) जैसे गहन दर्शनों को छूती है) को आधुनिक प्रणालीगत सोच, संज्ञानात्मक विज्ञान और तकनीकी अनुप्रयोगों के साथ गहराई से एकीकृत करने वाला एक व्यापक ढाँचा है। इसकी मुख्य संचालन क्रियाविधि "कर्म ही कार्य-कारण है (Karma is Causality)" इस ब्रह्मांडीय नियम की गहन समझ पर आधारित है: फल का कारण अवश्य होता है (Effect must have a cause), विचार (मानसिक विचार, इरादे, विशेष रूप से अविद्या (Avidyā/Ignorance)) कारण हैं, क्रियान्वयन (शारीरिक और वाचिक क्रियाओं का कार्यान्वयन) फल है, और प्रत्यय (स्थितियाँ, सहायक कारक) कारण और फल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल हैं। प्रत्यय के उत्पन्न होने का समय फल के प्रकट होने का क्षण है, प्रत्यय के समाप्त होने का दिन फल के नष्ट होने का समय है। यह कार्य-कारण का नाश नहीं होता (Cause and Effect Never Perishes) का नियम त्रिकाल (Three Times) में व्याप्त है, षड्गति संसार (Six Realms of Saṃsāra) (अर्थात सर्व भव (All Existences/Forms of Being) में फंसा हुआ, जिसमें तीन दुर्गति [नरक, प्रेत, पशु] और तीन सद्गति [मनुष्य, असुर, देव] शामिल हैं) को चलाने वाली मूलभूत शक्ति है, और यह विमुक्ति (Liberation) ( सर्व भव का उन्मूलन) और यथार्थ सत्य (True Reality) की प्राप्ति के अभ्यास का आधार भी है। जैसा कि बुद्ध ने सुभद्र को इंगित किया था, भले ही नैवसंज्ञानासंज्ञायतन समापत्ति (समाधि की उच्चतम अवस्था) प्राप्त कर ली जाए, यदि यथार्थ सत्य का अवलोकन नहीं किया गया है, तो भी सर्व भव का उन्मूलन नहीं हुआ है, मौलिक विमुक्ति अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि यह समाधि अभी भी "संज्ञा" कहलाती है, जबकि निर्वाण "असंज्ञा" है (सभी सूक्ष्म विचार भेदों से परे)। इसका उद्देश्य एक ऐसे सर्वांगीण प्रज्ञा संचालन प्रणाली का निर्माण करना है जो संज्ञानात्मक जागरण ( तीन दुर्लभताओं (Three Difficulties), पंच कषाय दूषित युग (Five Turbidities of the Evil Age) को पहचानना, अपनी अंतर्निहित बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) की क्षमता को जानना, यथार्थ सत्य (True Reality) के अद्भुत धर्म को सुनना), क्षमता निर्माण (सैंतीस बोधिपाक्षिक धर्म (Thirty-Seven Aids to Enlightenment), शील, समाधि, प्रज्ञा (Śīla, Samādhi, Prajñā), पंच गुण धर्मकाय (Five-Part Dharmakāya) का अभ्यास करना, बोधि मार्ग (Bodhi Path) का अनुसरण करना, शुभ हेतु (Good Cause) बोना, शुभ प्रत्यय (Good Condition) बनाना ताकि शुभ फल (Good Effect) प्राप्त हो सके, मुख्य रूप से प्रज्ञा के माध्यम से यथार्थ सत्य (True Reality) का अवलोकन करना), प्रज्ञा उन्नयन (प्रतीत्यसमुत्पाद और शून्यता (Dependent Origination and Emptiness), परमार्थ-शून्यता (First Principle Emptiness) अर्थात यथार्थ सत्य (True Reality) को समझना, पुद्गल नैरात्म्य और धर्म नैरात्म्य (Emptiness of Person and Emptiness of Dharmas) [द्वि-शून्यता] को तोड़ना, पंच चक्षु (Five Eyes) से युक्त होना), बोधिसत्त्व आचरण (Bodhisattva Practice) (बोधिचित्त (Bodhicitta) उत्पन्न करना, षट् पारमिता (Six Pāramitās)/दश पारमिता (Ten Pāramitās) का अभ्यास करना, दृढ़ विश्वास कि इच्छन्तिक (Icchantika) भी बुद्धत्व प्राप्त (Attain Buddhahood) कर सकता है), से लेकर परम पूर्णता (बुद्धत्व प्राप्ति (Attaining Buddhahood), त्रिकाय चतुर्ज्ञान (Three Bodies and Four Wisdoms) की प्राप्ति, स्थायी निर्वाण (Permanent Nirvana) के नित्य, सुख, आत्मा, शुद्ध (Permanence, Bliss, Self, Purity) चार गुणों में स्थित होना, यह सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light) में स्थित होना है) और धर्मधातु (Dharmadhātu) का अद्भुत उपयोग (तथता धर्मधातु (Tathatā Dharmadhātu) में स्थित होना, धर्मधातु (Dharmadhātu) का सुशासन करना, धर्मकाय (Dharmakāya) के गुणों को प्रकट करना) तक विस्तृत है। यह न केवल एक सैद्धांतिक मॉडल है (जैसे कि सूत्रों का प्रस्तावना भाग (Preface Section)), बल्कि यह व्यक्ति ( मनुष्य यान (Human Vehicle), देव यान (Deva Vehicle) के आधार वाले भी शुरू कर सकते हैं) और सामूहिक (षट् सामंजस्य (Six Harmonies) की भावना को दर्शाते हुए), जटिल और भ्रामक आधुनिक "पंच कषाय दूषित युग (Five Turbidities of the Evil Age)" (कामधातु (Desire Realm), रूपधातु (Form Realm), अरूपधातु (Formless Realm) से बने त्रिलोक (Three Realms) के दुःख सागर में, षड्गति संसार (Six Realms of Saṃsāra) के सर्व भव (All Existences) से भरा हुआ) में, अविद्या (Ignorance) के भ्रमजाल (परिकल्पित स्वभाव (Imagined Nature), यथार्थ सत्य को न जानना ही संसार का आरंभ है (Not knowing True Reality is the beginning of Saṃsāra)) को भेदकर, आंतरिक सोई हुई बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) (अर्थात तथागतगर्भ (Tathāgatagarbha), छिपी हुई बुद्ध-प्रकृति (Hidden Buddha-Nature)) को जगाकर, स्थिरता से प्रज्ञा जागरण (Wisdom Awakening) (यथार्थ सत्य को जानने वाला, लोकोत्तर पुरुष कहलाता है (One who knows True Reality is called a World-Transcending Person)), सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व, पूर्ण विमुक्ति (Liberation) (महापरिनिर्वाण (Mahāparinirvāṇa) में प्रवेश करना), परम शांति (अनुत्तर सम्यक्संबोधि (Anuttarā Samyaksaṃbodhi)) की ओर बढ़ने के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा (जैसे कि सूत्रों का मुख्य भाग (Main Discourse Section) और प्रसार भाग (Distribution Section)) प्रदान करता है।

यह प्रणाली "मानव जन्म दुर्लभ है, बुद्धधर्म (Buddhadharma) सुनना दुर्लभ है, विशिष्ट धर्म द्वार दुर्लभ हैं" (तीन दुर्लभताएं (Three Difficulties), यह सुनने की उपलब्धि के छह आवश्यक शर्तों (Six Prerequisites) का आधार है) को मौलिक चेतावनी के रूप में लेती है, प्रत्यय (Conditions/Causes and Conditions) को संजोने, स्वयं के प्रयासों पर निर्भर रहने (वीर्य (Effort/Diligence)), बुरे कर्म (Karma) और उसके कार्य-कारण (Cause and Effect) प्रतिफल (जो त्रिकाल (Three Times) में प्रवाहित होता है) से बचने पर जोर देती है, गहराई से विश्वास करें कि "कर्म ही कार्य-कारण है", सभी सुख-दुःख आकस्मिक नहीं हैं, "फल का कारण अवश्य होता है"। विशेष रूप से "यथार्थ सत्य" धर्म द्वार को सुनना और समझना, यह जानना कि सभी सर्व भव के उन्मूलन का मूल "अनाकार स्वरूप" का अवलोकन करना है, अत्यंत दुर्लभ मुक्ति का सच्चा कारण है। और दस आयामों के माध्यम से परत दर परत आगे बढ़ती है: नींव रखना (आयाम 1-2: आपातकालीन आत्म-रक्षा और प्रारंभिक स्थिरता, बुद्धत्व की संभावना को पहचानना और यह समझना कि मुक्ति का मुख्य बिंदु यथार्थ सत्य को जानना है); व्यक्तिगत मुक्ति की तलाश (आयाम 1-4: दुःख के स्रोत का अवलोकन करना [दुःख सत्य (Truth of Suffering), समुदय सत्य (Truth of the Origin of Suffering), द्वादश निदान (Twelve Nidānas), यह पहचानना कि सभी भव दुःख हैं], मार्ग सत्य (Truth of the Path) का अभ्यास करना [जिसका मूल यथार्थ सत्य का अवलोकन है], अर्हत फल (Arhatship) प्राप्त करना [निम्न प्रज्ञा से यथार्थ सत्य का अवलोकन]); प्रज्ञा अंतर्दृष्टि को गहरा करना (आयाम 1-6: ब्रह्मांड के यथार्थ सत्य [सर्वधर्म यथार्थ सत्य (True Reality of All Dharmas)] का अन्वेषण करना, अवलोकन अभ्यास (Contemplative Practice) करना [मध्यम प्रज्ञा से यथार्थ सत्य का अवलोकन], प्रत्येकबुद्ध फल (Pratyekabuddha-hood) प्राप्त करना, परमार्थ-शून्यता (First Principle Emptiness) और बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) को समझना); दूसरों के लाभ के लिए संकल्प लेना (आयाम 1-8: चार महाप्रणिधान (Four Great Vows) करना, सभी सत्त्वों (All Sentient Beings) (दृढ़ विश्वास कि उन सभी में बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) है) का नेतृत्व करना, बोधिसत्त्व मार्ग (Bodhisattva Path) पर चलना [उच्च प्रज्ञा से यथार्थ सत्य का अवलोकन], बुद्धत्व प्राप्ति (Attaining Buddhahood) तक); अद्भुत उपयोग की पूर्णता (आयाम 1-10: स्थायी निर्वाण (Permanent Nirvana) में स्थित होना, धर्मधातु (Dharmadhātu) का सुशासन करना, बुद्ध (Buddha) की अवस्था प्राप्त करना, निरोध सत्य (Truth of Cessation) को प्रमाणित करना, धर्मकाय के रूप में प्रकट होना (Manifest as Dharmakāya), सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light) में स्थायी रूप से निवास करना)। पूरी प्रक्रिया आत्मनिर्भरता, प्रज्ञापूर्ण कार्रवाई (प्रज्ञा (Prajñā), विशेष रूप से यथार्थ सत्य (True Reality) का अवलोकन करने वाली प्रज्ञा), और करुणापूर्ण परोपकार (करुणा ध्यान (Compassion Meditation), चार अप्रमाण (Four Immeasurables)) पर जोर देती है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को भ्रम ( यथार्थ सत्य (True Reality) को न जानना) से जगाना, धीरे-धीरे विमुक्ति (Vimokṣa/Liberation) (यहां तक कि अष्ट विमोक्ष (Eight Liberations), अंततः सर्व भव (All Existences) को पूरी तरह से समाप्त करना) प्राप्त करना, अंततः अंतर्निहित बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) को प्रकट करना, निर्वाण (Nirvana) (यथार्थ सत्य (True Reality) की अवस्था) में प्रवेश करना, और धर्मधातु (Dharmadhātu) को समर्पित करना है।

समग्र सिद्धांत: लचीलापन और क्रमिकता

यह प्रणाली मॉड्यूलर रूप से डिज़ाइन की गई है, अभ्यासी व्यक्तिगत प्रत्यय (Conditions) (क्षमता, समय, क्षमता, प्रेरणा) के अनुसार प्रवेश बिंदु चुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, शुरुआती पहले आयाम से शुरू कर सकते हैं, जबकि अनुभवी सीधे पांचवें आयाम में प्रवेश कर सकते हैं, श्रवण, चिंतन, भावना (Hearing, Contemplating, Meditating) में गहराई से उतर सकते हैं। "आत्मनिर्भरता" पर जोर दिया जाता है, सरल उपकरणों (जैसे लेबल स्टिकर, एआई सहायक) के माध्यम से व्यावहारिकता सुनिश्चित की जाती है। अंततः, उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को उपयुक्त मार्ग खोजने में मदद करना है, दुःख से मुक्ति (सर्व भव (All Existences) का उन्मूलन) से धर्मधातु सामंजस्य (Dharmadhātu Harmony) (यथार्थ सत्य (True Reality) की प्राप्ति), स्थायी निर्वाण (Permanent Nirvana) (सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light)) में स्थित होने तक एक सहज संक्रमण प्राप्त करना है।


पहला आयाम: मुक्ति के अवसर की दुर्लभता को पहचानना — प्रत्यय को संजोना, जागरण की पूर्व शर्त


दूसरा आयाम: याद रखना — स्मृति सहायता और आत्म-सुदृढ़ीकरण


तीसरा आयाम: दुःख की वास्तविकता — पंच कषाय दूषित युग और सर्व भव की पहचान और निदान


चौथा आयाम: रुकना — कर्म करना बंद करना, आत्म-चिंतन करना, भ्रम विचारों को रोकना


पांचवां आयाम: गहन अभ्यास और प्रज्ञा का निर्माण — सैंतीस बोधिपाक्षिक धर्म और त्रिशिक्षा वृद्धि (यथार्थ सत्य के अवलोकन का बोधि मार्ग)


छठा आयाम: अवलोकन के विभिन्न स्तर — पंच चक्षु और यथार्थ सत्य प्रज्ञा


सातवां आयाम: महायान में प्रवेश करना, बोधिचित्त उत्पन्न करना, बोधिसत्त्व मार्ग पर चलना (सत्त्वों के लिए यथार्थ सत्य का प्रदर्शन और प्रमाण)


आठवां आयाम: बुद्धत्व प्राप्ति — बोधिसत्त्व मार्ग का गहनता और परम प्राप्ति (यथार्थ सत्य का पूर्ण प्रमाण)


नौवां आयाम: अनुत्तर सम्यक्संबोधि और धर्मधातु सामंजस्य — स्थायी निर्वाण में स्थित होना (यथार्थ सत्य सतत शांत निर्वाण प्रकाश)


दसवां आयाम: दश भूमि तथागत, धर्मधातु कैसे स्थापित करें, कार्य-कारण कैसे प्रकट करें, क्षमतानुसार कैसे सिखाएं — बुद्ध-प्रकृति और यथार्थ सत्य का अद्भुत उपयोग


निष्कर्ष: प्रज्ञा का प्रकाश, धर्मधातु को प्रकाशित करता है — बुद्ध-प्रकृति प्रकट होती है, यथार्थ सत्य स्थायी है

यह "परम प्रज्ञा संचालन प्रणाली: दस-स्तरीय प्रज्ञा पिरामिड एकीकृत अभ्यास प्रणाली (V3.7 वर्धित संस्करण - गहन बुद्धधर्म एकीकरण और कर्म एवं कार्य-कारण की गहरी समझ और निर्वाण एवं बुद्ध-प्रकृति का एकीकरण और यथार्थ सत्य एवं निर्वाण की गहन व्याख्या और V3.4 विवरण पूरक)", V3.7 के आधार पर, V3.4 संस्करण में सैंतीस बोधिपाक्षिक धर्म (Thirty-Seven Aids to Enlightenment), ध्यान (Meditation) स्तर, अवलोकन विधि (Contemplation Method), विज्ञप्तिमात्रता (Yogācāra) (त्रिस्वभाव (Three Natures), अष्ट विज्ञान (Eight Consciousnesses)), तियानताई (Tiantai) (एकचित्त त्रिकाय दर्शन (One Mind Three Contemplations), त्रिसत्य सामंजस्य (Perfect Harmony of the Three Truths), एक क्षण में तीन हजार (Three Thousand Realms in a Single Moment)), अवतंसक (Huayan) (धर्मधातु प्रतीत्यसमुत्पाद (Dharmadhātu Pratītyasamutpāda), षट् लक्षण (Six Characteristics), दश गहन द्वार (Ten Mysterious Gates), सर्वधर्म-अप्रतीघात (Non-obstruction between Phenomena)) आदि जैसे अधिक विस्तृत बुद्धधर्म (Buddhadharma) शब्द, सिद्धांत और अभ्यास विवरणों को फिर से संबंधित आयामों के विवरण में एकीकृत और मजबूत किया गया है। साथ ही, महापरिनिर्वाण सूत्र में यथार्थ सत्य (True Reality), अनाकार स्वरूप (Characteristic of No-Characteristic), परमार्थ-शून्यता (First Principle Emptiness), सर्व भव (All Existences), सर्व भव के उन्मूलन के लिए यथार्थ सत्य का अवलोकन आवश्यक है (Contemplation of True Reality is necessary to eliminate all existences), बुद्ध के परिनिर्वाण प्रक्रिया के ध्यान प्रदर्शन और सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light) आदि जैसे गहन सिद्धांतों को गहराई से एकीकृत किया गया है। यह पूरे ढांचे को न केवल सैद्धांतिक रूप से महापरिनिर्वाण सूत्र की मुख्य भावना के साथ अधिक गहराई से संगत बनाता है, बल्कि बुद्धधर्म (Buddhadharma) में ब्रह्मांडीय परम वास्तविकता (यथार्थ सत्य (True Reality)), संसार से मुक्ति (सर्व भव (All Existences) का उन्मूलन) के महत्वपूर्ण मार्ग (यथार्थ सत्य (True Reality) का अवलोकन) और अंतिम गंतव्य (सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light) के निर्वाण यथार्थ सत्य (Nirvana True Reality) में स्थित होना) के सटीक मार्गदर्शन को भी उजागर करता है, साथ ही V3.4 संस्करण में व्यापक बुद्धधर्म (Buddhadharma) प्रणाली समर्थन को बनाए रखता है और मजबूत करता है।

यह प्रणाली हमेशा स्वयं के प्रयासों और क्षमताओं पर निर्भर रहने (बोधि मार्ग का अनुसरण करना, शील, समाधि, प्रज्ञा का परिश्रमपूर्वक अभ्यास करना, मूल यथार्थ सत्य का अवलोकन है), बाहरी धन और शक्ति पर निर्भर न रहने पर जोर देती है; मनमाने ढंग से कार्य करने के परिणामों (सर्व भव में भटकना) के प्रति चेतावनी देती है, कार्य-कारण का सम्मान करना चाहिए (कार्य-कारण का नाश नहीं होता), लोगों और शक्तियों को नाराज करके प्रतिफल भुगतने से बचना चाहिए; वास्तविक बाधाओं (अविद्या यथार्थ सत्य को न जानना, यहां तक कि ध्यान आदि सूक्ष्म रूपों के प्रति आसक्ति, और "दिमाग याद नहीं रख पाता") पर ध्यान केंद्रित करती है, व्यावहारिक तरीके प्रदान करती है (भ्रामक विचारों को रोकना, स्मृति सहायता, शील, समाधि, प्रज्ञा के आधार पर यथार्थ सत्य का अवलोकन करना); और इंगित करती है कि भले ही परिस्थितियां कठिन हों (जैसे तीन दुर्गति (Three Evil Realms)), अपनी बुद्ध-प्रकृति पर दृढ़ विश्वास रखना चाहिए, "बाहर निकलने की क्षमता" (सर्व भव का उन्मूलन करना, यथार्थ सत्य निर्वाण में प्रवेश करना) विकसित करनी चाहिए। आयामों की क्रमिक प्रगति के लचीले डिजाइन के माध्यम से, इसका उद्देश्य विभिन्न क्षमताओं (मनुष्य और देव यान (Human and Deva Vehicles), श्रावक यान (Śrāvaka Vehicle), प्रत्येकबुद्ध यान (Pratyekabuddha Vehicle), बोधिसत्त्व यान (Bodhisattva Vehicle), निम्न, मध्यम, उच्च प्रज्ञा (Lower, Middle, Supreme Wisdom) सभी इसके अनुसार यथार्थ सत्य (True Reality) का अवलोकन करके मुक्ति पा सकते हैं) के अभ्यासियों को लाभ पहुंचाना है, ताकि सभी अपने लिए उपयुक्त प्रारंभिक बिंदु और मार्ग खोज सकें।

कामना है कि यह आगे निर्वाण यथार्थ सत्य (Nirvana True Reality) की गहरी व्याख्या को एकीकृत करने वाला और V3.4 के समृद्ध विवरणों से पूरक V3.7 वर्धित संस्करण प्रणाली, बोधि मार्ग (Bodhi Path) पर प्रत्येक यात्री के लिए एक स्पष्ट और अधिक व्यापक प्रकाशस्तंभ और मानचित्र के रूप में कार्य करे, व्यक्ति को सोई हुई बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) (बोधि (Bodhi) की प्राप्ति) जगाने में सहायता करे, धर्मधातु (Dharmadhātu) के रहस्यों (एकचित्त त्रिकाय दर्शन (One Mind Three Contemplations), धर्मधातु प्रतीत्यसमुत्पाद (Dharmadhātu Pratītyasamutpāda), सर्वधर्म-अप्रतीघात (Non-obstruction between Phenomena), अर्थात यथार्थ सत्य (True Reality) जैसे) को समझने में मदद करे, प्रत्यय कार्य-कारण नियम का कुशलतापूर्वक उपयोग करे (सर्व भव (All Existences) के कार्य-कारण को जानना), यथार्थ सत्य के अवलोकन का परिश्रमपूर्वक अभ्यास करे, अंततः सर्व भव (All Existences) को पूरी तरह से समाप्त करे, नित्य, सुख, आत्मा, शुद्ध (Permanence, Bliss, Self, Purity) वाली महापरिनिर्वाण यथार्थ सत्य (Mahāparinirvāṇa True Reality) अवस्था (सतत शांत निर्वाण प्रकाश (Constant Silent Extinguishing Light), एक सत्य धर्मधातु (One True Dharmadhātu)) में प्रवेश करे, और इस प्रज्ञा (Wisdom) और करुणा (Compassion) के प्रकाश से, धर्मधातु (Dharmadhātu) को प्रकाशित करे, असंख्य सत्त्वों (Sentient Beings) (सभी सचेतन प्राणी (All Sentient Beings)) को लाभ पहुंचाए, संयुक्त रूप से धर्मधातु (Dharmadhātu) के प्रकाश और सामंजस्य (Harmony) (सतत शांत प्रकाश शुद्ध भूमि (Pure Land of Constant Silent Light)) की ओर बढ़ें।


नोट: इस प्रणाली में बड़ी संख्या में बुद्धधर्म शब्द और सिद्धांत शामिल किए गए हैं, विशेष रूप से आपके द्वारा प्रदान किए गए महापरिनिर्वाण सूत्र के अंशों के आधार पर इसे गहरा किया गया है, और V3.4 की विस्तृत सामग्री को एकीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य एक व्यापक, गहन ढाँचा प्रदान करना है। इसमें कई अवधारणाओं (विशेष रूप से विज्ञप्तिमात्रता (Yogācāra), तियानताई (Tiantai), अवतंसक (Huayan) संप्रदाय के सिद्धांत, महापरिनिर्वाण सूत्र के गहरे दार्शनिक सिद्धांत, जैसे यथार्थ सत्य (True Reality) का गहन अर्थ और इसकी अवलोकन पद्धतियाँ, विशिष्ट ध्यान (Meditation) क्रम (जैसे चार ध्यान आठ समापत्ति (Four Dhyānas and Eight Samāpattis), नौ आनुपूर्वी समाधि (Nine Sequential Samādhis)) और उनका अतिक्रमण, कार्य-कारण (Cause and Effect) का सूक्ष्म संचालन (जैसे आलय प्रतीत्यसमुत्पाद (Ālaya Dependent Origination)), बुद्ध-प्रकृति (Buddha-Nature) और निर्वाण यथार्थ सत्य (Nirvana True Reality) की गहन अवस्थाएँ, और बोधिसत्त्व मार्ग (Bodhisattva Path) के विभिन्न चरणों के विशिष्ट आचरण) के लिए, अभी भी संबंधित सूत्रों और शास्त्रों के गहन अध्ययन और योग्य कल्याणमित्र (Good Spiritual Friends) के मार्गदर्शन के माध्यम से ही सटीक, संपूर्ण समझ और अभ्यास प्राप्त किया जा सकता है। यह प्रणाली एक "संचालन प्रणाली" के रूप में, संरचना, अंतर्संबंध और क्रमिक चरण प्रदान करने पर केंद्रित है; विशिष्ट "अनुप्रयोग" (साधना विधियों के विवरण) को अलग से सीखने की आवश्यकता है।